281 farmers earn huge profits by joint farming

किसान

छत्तीसगढ़ के करतला में 281 किसान सामूहिक खेती करके कमा रहे बड़ा मुनाफा

छत्तीसगढ़ के करतला व कोरबा ब्लॉक के किसान सामूहिक रूप से खेती करके आत्मनिर्भर बनते जा रहे हैं. पहले ये सभी किसान केवल धान की खेती पर ही निर्भर रहते थे लेकिन चार साल पहले किसानों ने मिलकर इंटर क्रॉप करना शुरू किया था. अब उनकी आमदनी चार गुना तक बढ़ गई है. अब यहां के किसान धान के अलावा मूंगफली, आलू, प्याज के साथ-साथ सब्जियों की फसल लेते हैं. इस बदलाव का व्यापक असर अब आसपास के किसानों पर भी पड़ने लगा है. हालांकि, किसानों को इससे बड़ी मात्रा में मुनाफा हो रहा है.

बाड़ लगाना चुनौती

किसान, कन्हैया राठिया बताते हैं कि उनकी 5 एकड़ जमीन में से 2 एकड़ भाठा जमीन थी. इसलिए महज 3 एकड़ में ही धान की फसल लगाते थे. नतीजतन परिवार की वार्षिक आय मात्र 10 से 15 हजार ही थी. इससे बच्चों को न तो ठीक से पढ़ाई करा पाते थे और न ही अन्य खर्च के लिए रुपए मिल पाते थे. स्थिति को देखते हुए चार साल पहले किसानों ने बैठक कर भाठा जमीन को उपजाऊ बनाने का निर्णय लिया. इसमें नाबार्ड का भी सहयोग मिला. पहले सभी ने खेती को सुरक्षित करने के लिए बाड़बन्दी की ताकि जानवर फसल को नुकसान न पहुंचाएं. इसके लिए बारबेट तार खरीदने के साथ ही लकड़ी की व्यवस्था करने में समय लगा. इसके बाद जमीन में आम, काजू का पौधारोपण करने के साथ ही बेर लगाए ताकि लाखों की आमदनी हो सके. सभी ने मिलकर सिंचाई के लिए बोरवेल लगाया. जिसका पानी सभी के बाड़ी में जाता है. इसके बाद किसानों ने इंटर क्रॉप लेना शुरू किया जिससे उनकी अतिरिक्त आय होने लगी. अब सालना 50 से 60 हजार की अतिरिक्त आय हो जाती है और साथ ही किसानों की संख्या में भी बढ़ोतरी होती जा रही है.

महिलाएं समूह में कर रहीं कार्य

इस गांव की महिलाएं भी खेती को आगे बढ़ाने के लिए तेजी से समूह में कार्य कर रही हैं. नाबार्ड के स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई महिलाएं 31 लाख रूपए का कर्ज लेकर गांव में अलग-अलग व्यवसाय करने का कार्य कर रही हैं. महिलाएं सिलाई मशीन के साथ ही सब्जी उत्पादन, अगरबत्ती उत्पादन, बकरी पालन, होटल, किराना, सुहाग, भंडार और बांस के शिल्प का कार्य भी कर रही हैं. छोटे-छोटे व्यापार से भी महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. महिलाओं का कहना है कि पहले काम करने के लिए उनको बाहर जाना पड़ता था लेकिन अब घर में ही इतना काम है कि कहीं बाहर जाने की जरूरत ही नहीं रहती है.

सामूहिक खेती में किसानों को मिली सफलता, 173 किसानों की जमीन मिलकर बनी 200 एकड़

अधिकतर छोटे किसान भूमि की कमी के कारण अपनी खेतीबाड़ी को सफल नहीं बना पाते हैं. ऐसे में छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में किसानों ने सामूहिक खेती कर एक मिसाल कायम की है. यह खेती कृषि महाविद्यालय और अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों के सहयोग से सफल साबित हुई है. अब इस खेती से किसानों को लाभ भी मिलने लगा है.

सामूहिक खेती में मिली सफलता

जिले के भोंड गांव में करीब 173 किसानों की भूमि को मिलाकर 200 एकड़ भूमि बनाई गई है. किसानों को बड़े स्तर पर खेती करने में बड़ी सफलता हासिल हुई है. इस वक्त किसान वहां धान समेत कई अन्य फसलों की खेती कर रहे हैं. पिछले साल भी बस्तर ब्लॉक के लामकेर में भी सामूहिक खेती की गई थी.

कृषि वैज्ञानिकों ने की मदद

किसानों का कहना है कि कृषि महाविद्यालय के कई वैज्ञानिकों ने मक्का, चना, गेहूं और सब्जियों की खेती करने में काफी मदद की है. उनके सहयोग से ही समय पर खेती हो पाई है, जिसका फायदा किसानों को मिला है. पिछले साल किसानों ने कम समय में अधिक फायदा देने वाली फसलों का चयन किया था. उन्होंने 30 एकड़ में मक्का, 25 एकड़ में चना, 20 एकड़ में गेहूं और 20 एकड़ में सब्जियों की खेती की थी. कृषि वैज्ञानिक की सलाह पर ही किसानों ने पहली बार इतने बड़े रकबे में खेती की और उसका लाभ भी उठाया है. इस तरह की खेती भोंड गांव में भी किसानों ने की है. इस योजना में करीब 75 लाख रुपए की लागत लगती है, जिसका लाभ किसान जीवनभर उठा सकते हैं.

4 एकड़ भूमि को बना दिया 200 एकड़

कृषि वैज्ञानिकों ने सामूहिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रेरित करने की योजना बनाई. इसके बाद उस भूमि का चुनाव किया गया, जहां किसान खेती न के बराबर करते थे. इस भूमि की सिंचाई के लिए इंद्रावती नदी के पानी का उपयोग किया गया. इसके साथ ही आवारा मवेशियों से नुकसान को रोकने फेंसिंग की व्यवस्था की गई. यह खेती छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.

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