BPL farmer is earning lakhs from manure prepared with cow dung in Madhya Pradesh

अमेरिकन केसर की खेती
अमेरिकन केसर की खेती
अमेरिकन केसर की खेती

पढ़ाई के लिए छोड़ दिया था घर, अब ख़ास तकनीक से उगा रहे ऐसे फल

नरसिंहपुर से पांच किमी की दूरी पर स्थित खमरिया गांव में ताराचंद का 22 एकड़ में खेत है।

भोपाल में बचपन से खेती का शौक है। 12 वीं के बाद और पढ़ना चाहता था, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। लोगों की मदद से मैंने पोस्ट ग्रैजुएशन पूरा किया। पढ़ाई पूरी करके वापस गांव लौटा। खेती करने लगा। आज लगभग 2500 किसानों से मैं जैविक खेती करवा रहा हूं। यह कहना है मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले में रहने वाले ताराचंद बेलजी का। लगभग एक दशक से ताराचंद ने जैविक खेती पर रिसर्च और प्रयोग कर एक मिसाल कायम की है। हाल ही में टाटा केमिकल्स ने ताराचंद से पैलेट कम्पोस्ट और सजीव कम्पोस्ट तकनीक से बनाई गई जैविक खाद खरीदी है। अब खाद बनाने की तकनीक को जल्द ही टाटा केमिकल्स द्वारा अपनाया जाएगा। ताराचंद का कहना है कि यह खाद किसानों के लिए यूरिया का विकल्प है। खाद के प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और फसल उत्पादन में बढ़ोतरी होती है।
एक पौधे से उगाई एक हजार लौकी

ताराचंद ने गिलकी, लौकी, पपीता समेत कई फसलों पर खाद का प्रयोग किया है। उन्होंने बताया कि खाद के प्रयोग और जैविक तकनीक से वे एक लौकी के पौधे में एक हजार लौकी उगा चुके हैं। आज कई किसान इस तकनीक को आजमा रहे हैं।
हर साल कमाते हैं 4 से 5 लाख रुपए

नरसिंहपुर से पांच किमी की दूरी पर स्थित खमरिया गांव में ताराचंद का 22 एकड़ में खेत है। फिलहाल उन्होंने अपने खेत में अमरुद, गेहूं, चना, मसूर आदि बोया है। यहां वे जैविक और अग्निहोत्र पद्धति से खेती करते हैं। जिससे वे साल भर में लगभग 4 से पांच लाख रुपए कमा लेते हैं।

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