Guava plantation can change the life of a farmer

बागान
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गरीबी उन्मूलनः किसानों की जिंदगी बदल रहे 15600 हेक्टेअर में अमरूद के बागान

बागवानी में इलाहाबादी अमरूद की खेती अब व्यवसायिक रूप ले चुकी है। किसान इलाहाबादी अमरूद बागान से कम मेहनत और लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

पूरे देश में अपने अलग स्वाद के लिए मशहूर इलाहाबादी अमरूद अब बाराबंकी के किसानों की जिंदगी बदलने लगा है। बागवानी में इलाहाबादी अमरूद की खेती अब व्यवसायिक रूप ले चुकी है। किसान इलाहाबादी अमरूद बागान से कम मेहनत और लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं। अमरूद की इलाहाबादी सफेदा प्रजाति बाराबंकी से कई प्रदेशों की बाजारों में पहली पसंद बनता जा रहा है। यही वजह है कि यहां के किसान अमरूद बागान का रकबा तेजी से बढ़ा रहे हैं। अब बाराबंकी में अमरूद बागान का रकबा 15600 हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

थोक बिक्री 25-30 रुपये किलो

बाराबंकी के सेलुहामऊ किसान गोकरन वर्मा बताते हैं कि तीन वर्ष में अमरूद की बाग तैयार हो गई थी, तब से प्रति वर्ष उसमें से दो से तीन लाख की शुद्ध कमाई हो जाती है। अमरूद की खेती वर्ष में दो फसलें मिल जाती हैं। एक फसल जुलाई में व दूसरी फसल दिसंबर से फरवरी तक ली जाती है। बिक्री के लिए अमरूद बाग से फुटकर विक्रेता ले जाते हैं। इस समय थोक में 25 से 30 रुपये किलो अमरूद आसानी से बिक जाता है। इस समय उनके पास लोग अमरूद की खेती सीखने के लिए आते हैं। इसके आलावा क्षेत्र के जंगरा फार्म में सौरंगा साड़भारी, चिरैया गांव में भी किसान अमरूद की बागवानी कर अच्छा मुनाफा कमा रहे है।

प्रजातियां और आसान पौधरोपण

अमरूद की प्रमुख किस्मों में इलाहाबादी सफेदा, सरदार 49 लखनऊ, सेबनुमा अमरूद, इलाहाबादी सुरखा, बेहट कोकोनट आदि हैं। इसके अतिरिक्त चित्तीदार, रेड फ्लेस्ड, ढोलका, नासिक धारदार आदि किस्में हैं। इलाहाबादी बागवानी के लिए उत्तम किस्म है। इलाहाबादी व सुरखा अमरूद की नयी किस्म है। पौधे लगाने का उचित समय जुलाई, अगस्त है। जहां पर सिंचाई की व्यवस्था हो, वहां फरवरी, मार्च में भी लगाए जा सकते हैं। 20 से 25 गड्ढों में 1 किलोग्राम सड़ी हुई गोबर की खाद और आर्गेनिक खाद और ऊपरी मिट्टी मिश्रण में मिलाकर गड्ढे को अच्छी तरह से भर देते हैं।

कीड़ों को मारने के लिए नीम के पत्ते

अमरूद में कीड़े व बीमारी का प्रकोप मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में होता है। अमरूद के पेड़ में मुख्य रूप से छाल खाने वाले कीड़े, फल छेदक, फल में अंडे देने वाली मक्खी, शाखा बेधक आदि कीट लगते हैं। इन कीटों के प्रकोप से बचने के लिए नीम की पत्तियों की उबले पानी का छिड़काव करना चाहिए।

विटामिन की होती भरपूर मात्रा

यह स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक फल है। इसमें विटामिन सी अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त विटामिन ए तथा बी भी पाए जाते हैं। इसमें लोहा, चूना तथा फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं। अमरूद की जेली तथा बर्फी बनाई जाती है। बाराबंकी के जिला उद्यान अधिकारी जयकरण सिंह ने बताया कि जिले में लगभग 15 हजार 600 हेक्टेयर भूमि पर अमरूद की खेती की जाती है। खेती करने के लिए विभाग की ओर से अनुदान भी दिया जाता है।

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