Hydroponics technology grow immunity booster vegetables without using soil

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Hydroponics Technology: इस तकनीक से बिना मिट्टी बंद कमरे उगा रहे इम्यूनिटी बूस्टर सब्जियां, जानिए तरीका?

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रहने वाले दो दोस्त गौरव रस्तोगी और दीपांकर गुप्ता के जुनून और लगन ने एक मिसाल कयाम की है. इन दोनों दोस्तों ने पुराने लखनऊ की तंग गली में बने एक पुराने मकान से खेती करना शुरू किया है. इस मकान में सिर्फ एलईडी रोशनी है, तो वहीं 21 डिग्री एसी का तापमान है, साथ ही 2 हजार लीटर पानी का प्रवाह है, लेकिन फिर भी सफल किसानों ने एक विशेष प्रकार के स्टैंड पर लाल और हरी लेक्टस, पार्सली, पर्पल बेसिल, अमेरिकन कॉर्न समेत लगभग 12 तरह की लीफी ग्रीन यानी हरी सब्जियां उगाई हैं. इस नए स्टार्टअप को बियांड आर्गेनिक का नाम दिया गया है. यहां हाइड्रोपोनिक्स तकनीक (Hydroponics Technology) से इनडोर फार्मिंग कर इम्युनिटी बूस्टर हरी पत्तेदार सब्जियां उगाई जा रही हैं.

क्या है हाइड्रोपोनिक्स तकनीक? (What is hydroponics technology?)

जब सिर्फ पानी, बालू या कंकड़ों के बीच नियंत्रित पानी-हवा और बिना मिट्टी के पौधे उगाए जाते हैं, तो उसको हाइड्रोपोनिक तकनीक कहा जाता है. सफल किसानों का मानना है कि आने वाले समय में पानी की समस्या बढ़ सकती है. ऐसे में खेती का यह तरीका काफी फायदेमंद साबित होगा. इस तकनीक में परंपरागत खेती की तुलना में लगभग 90 प्रतिशत कम पानी इस्तेमाल होता है. खास बात है कि इस खेती में किसी तरह के कीटनाशक का उपयोग नहीं किया गया है.

नौकरी छोड़ अपनाई खेती

गौरव मुंबई में फाइनेंसियल एनालिस्ट का काम करते थे, तो वहीं दीपांकर सीए फर्म में नौकरी किया करते थे. मगर दोनों दोस्त कुछ अलग करना चाहते थे, इसलिए नौकरी छोड़कर इनडोर फॉर्मिंग का करने लगे. एक पुराने और खाली पड़े घर में इसकी शुरुआत की. पहले एक कमरे में खेती करते थे, लेकिन अब छत पर भी गर्मी के सीजन वाली सब्जियां भी उगा रहे हैं. सफल किसान अब स्ट्राबेरी और खीरे की खेती भी करने वाले हैं.

हरी सब्जियों के फायदे

  • खून की मात्रा बढ़ाती हैं.
  • मोटापे घटाने में मदद मिलती है.
  • दांतों, कैंसर, एनीमिया और पथरी के लिए लाभकारी है.
  • यह विटामिन, मिनरल्स और प्रोटीन से भरपूर होती हैं.
  • कई पोषक तत्व मौजूद होने की वजह प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.

अन्य जानकारी

किसानों का कहना है कि जब हरी सब्जियां हिमाचल और उत्तराखंड से आती हैं, तो लगभग 5 से 6 दिन लगते हैं. ऐसे में इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. मगर हम फार्म टू टेबल के मॉडल पर काम करते हैं. यानी इस तरह 1 से 2 घंटे के भीतर ताजी कटी सब्जियां ग्राहक तक पहुंचाई जा सकती हैं.

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