मछलीपालन

शानदार नौकरियों के ऑफर छोड़ कपिल राणा ने किसानों को दिखाई नई राह, अब ये काम कर बन रहे प्रेरणा

उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी युवा कपिल राणा ढेरों शानदार नौकरियों के ऑफर छोड़कर किसानों को उनकी आय बढ़ाने के लिए नई दिशा दिखा रहे हैं। किसानों को मछली पालन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मछली पालन का रकबा बढ़ा है। जलकृषि को बढ़ावा देने के लिए मछली पालन की पहल की जा रही है।

हरियाणा के सिरसा में कपिल ने मछली पालन कर किसानों के लिए नई राह खोल दी है। आगे जानें आखिर कैसे कपिल किसानों को जलकृषि के लिए कर रहे हैं प्रेरित और मछली पालन से आय बढ़ाने की दिशा में बन रहे हैं दूसरों की प्रेरणा :-

मछली पालक किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान मछलियों में होने वाली बीमारियों और फिश फीड देने की सही जानकारी नहीं होने के कारण होता है। इन्हीं बातों की जानकारी और बीमारियों के बारे में तकनीकी सलाह कपिल राणा देते हैं। गाजियाबाद के लोनी में जल्द ही पचास एकड़ तालाब में मछली पालन की शुरूआत कराई है।

निरपुड़ा गांव निवासी कपिल राणा मत्स्य विज्ञान में नागार्जुन विवि आंध्र प्रदेश से स्नातकोत्तर हैं। इसके साथ ही वह खुद दस एकड़ जलक्षेत्र में मछली पालन करते हैं। वह अपने तालाबों में रोहू, कतला, मृगल और पंगेसियस मछली का पालन कर रहे हैं। कपिल अपने साथ ही अन्य किसानों को मछली पालन के लिए निरंतर प्रोत्साहित करते रहते हैं।

कपिल बताते हैं कि वह खुद प्रदेश के साथ ही देश के अन्य राज्यों में मछली पालक किसानों को तकनीकी सलाह देते हैं। वह बताते हैं कि मछली पालन में 40 प्रतिशत निवेश कर 60 प्रतिशत लाभ कमाया जा सकता है, बशर्ते कि किसान मछली पालन वैज्ञानिक तकनीक से करें।

कपिल बताते हैं कि वे मछली पालक किसानों को सलाह देने के लिए पूरा देश घूम चुके हैं। वह मुख्यत: नए किसानों को तालाब के लिए साइट सेलेक्शन, जल की जांच, फिश फीड, बीमारियों और मछली बिक्री के लिए बाजार की समस्या का समाधान करते हैं।

सीफा में प्राप्त किया प्रशिक्षण

कपिल ने बताया कि अभी पिछले महीने ही उन्होंने देश की अग्रणी शोध संस्थान केंद्रीय मीठाजल जीवपालन अनुंसाधन केंद्र (सीफा) में जलकृषि में स्वास्थ्य व पर्यावरण प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण प्राप्त किया है। प्रदेश से सात किसान, अधिकारी और इंटरप्रोन्योर ने भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है।

कपिल बताते हैं कि इस प्रशिक्षण में ओडिशा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु पांडिचेरी आंध्रप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, दिल्ली, तेलंगाना कुल बारह राज्यों के मछली पालक किसान और विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मछली पालक किसानों को मछली पालन की उन्नत तकनीक से अवगत कराया गया।

ऐसे होगी आय दोगुनी

सीफा में मछली पालकों की आय दोगुनी करने हेतु मछली की कई किस्म विकसित की गई हैं जिसमें जयंती रोहू, इंप्रूव्ड कतला शामिल हैं। इंप्रूव्ड कतला दिखने में सामान्य कतला जैसा ही लेकिन इसकी बढ़वार 17 प्रतिशत अधिक है। वहीं जयंती रोहू में रोग प्रतिरोधक क्षमता है। इन गुणों के कारण ही दोनों ही किस्म की मछलियां किसानों के लिए लाभदायी है।

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