Lakhpati made by cultivating pumpkin with peas

कद्दू की खेती

मटर के साथ कद्दू की खेती करके किसान ननकऊ राजपूत बना लखपति

कद्दू की खेती
कद्दू की खेती

आज हम बात कर रहे हैं ऐसे ही सफल किसान ननकऊ राजपूत के बारे में, जिन्होंने अपने खेत में दो फसलों की खेती कर मुनाफा कमाया है. वह उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले के रहने वाले है. उन्होंने बिल्कुल भी पढ़ाई नहीं की, फिर भी उनको कृषि क्षेत्र का बहुत ज्ञान है. उनके पिता भी किसान थे जिनको देखते हुए उनकी भी दिलचस्पी कृषि में बन गई.

बचपन से उनके अंदर कुछ अलग कर दिखाने का जज़्बा था जिसको उन्होंने अपनी कृषि में अपनाया. उन्होंने अपने खेतों में हरे मटर और कद्दू की खेती करने का विचार बनाया क्योंकि मटर की खेती बहुत अधिक मात्रा में हमारे देश के कई बड़े राज्यों में की जाती है. मटर की खेती करने वाले राज्यों में उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा आदि राज्य आते हैं.

ननकऊ बताते हैं कि वह मटर की खेती के साथ कद्दू की भी खेती करते है. मटर की खेती में 12 फ़ीट के अंतराल पर एक नाली बनाई जाती है. जिसके बीच वह कद्दू की बुवाई करते है. मटर की खेती ठंडे मौसम में की जाती है जैसे अक्टूबर के बीच में या फिर नवंबर के पहले हफ्ते में की जाती है. वह बताते है कि कभी बेमौसम बरसात हो जाने की वजह से हमारी पूरी फसल ख़राब हो जाती थी. जिस वजह से उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता था इसलिए उन्होंने दोहरी फसल की खेती करने का सोचा. उन्होंने मटर के साथ कद्दू की भी खेती शुरू कर दी, जिससे काफी अधिक लाभ होने लगा. फिर वह हर साल हरी मटर के साथ कद्दू की खेती करने लगे.

मटर के साथ ही वह कद्दू की भी बुवाई करते हैं. मटर की फसल फरवरी तक पकने लग जाती है. जिसके बाद दिसंबर और जनवरी की ज्यादा ठंड में कद्दू के पौधे बढ़ते नहीं है. मार्च में मटर खत्म हो जाता है और तब तापमान भी गर्म होने लगता है और इस गर्म तापमान कि वजह से कद्दू के पौधे में विकास होना शुरू हो जाता है.

एक एकड़ खेत में मटर की फलियों से करीब 70 से 80 कुंतल तक का उत्पादन प्राप्त होता है. कद्दू से एक एकड़ खेत में ढाई सौ से 300 कुंतल तक का उत्पादन मिलता है.मटर की फसल 60 -70 दिनों में तैयार हो जाती है. जिसमें एक एकड़ फसल में उन्हें करीब 15 -20 हजार रुपये तक की लागत आती है.मटर बाज़ारों में शुरूआती समय में दो हजार रुपए प्रति कुंतल से लेकर फरवरी में खत्म होने वाली फसल तक होती है और 700- 800 रुपये प्रति कुंतल तक बिकती है.

कद्दू की फसल का मार्च के आखिर में और अगस्त की शुरुआत में उत्पादन होता है. जो 1000- 1500 रुपये प्रति कुंतल तक बिकता है. मई के आखिर और जून की शुरुआत में कद्दू की फसल खत्म होने के समय यह 300 – 400 रुपये प्रति कुंतल तक बिकती है. इस खेती में लागत कम लगती है और मुनाफा बहुत अधिक होता है. इस खेती में आप 3 – 4 लाख रुपये तक कमा सकते है.

तो देखा आपने किस तरह आप एक एकड़ खेत में 2 फसलों की खेती कर ननकऊ राजपूत की तरह मुनाफा कमा सकते हैं.

Lakhpati made by cultivating pumpkin with peas

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