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Monard grass will become the choice of celery

Monard grass will become the choice of celery

सूरजमुखी की खेती
सूरजमुखी की खेती

अजवाइन का विकल्प बनेगी मोनार्डा घास, बुंदेलखंड की बढ़ायेगी आय

अमेरिका और मैक्सिको में बहुतायत में पाई जाने वाली मोनार्डा सिट्रियोडोरा घास देश में अजवाइन का विकल्प बनेगी। जम्मू स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंट्रीगेटिव मेडिसिन (आइआइआइएम) के जरिये पहाड़ों व जंगलों से खोज कर इसके औषधीय गुणों की पहचान की गई है। वहीं सुगंध एवं सुरस विकास केंद्र (एफएफडीसी) कन्नौज ने मैदानी जिलों की जमीन, बुंदेलखंड व कम पानी वाले इलाकों में इसकी पैदावार बढ़ाने का सफल परीक्षण कर लिया है। केंद्र परिसर में सहायक निदेशक एपी सिंह सेंगर की देखरेख में एक एकड़ जमीन में उपज के बाद निकले बीज व तेल से भविष्य की संभावनाएं तलाशने का काम शुरू हो चुका है।

जनवरी से अप्रैल के बीच होती तैयार

उपनिदेशक एफएफडीसी नदीम अकबर ने बतया, मोनार्डा सिट्रियोडोरा घास को नींबू बेबम के नाम से भी जानते हैं। इसे जनवरी से अप्रैल के बीच तैयार किया जा सकेगा। महज तीन से चार बार सिंचाई में यह तैयार होगी। इसके बाद बीज व तेल निकाल कर अलग-अलग तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1500 रुपये प्रतिकिलो तक की बिक्री होगी। अजवाइन का तेल 650 रुपये में बिकता है। मोनार्डा में औषधीय तत्व थाइमॉल 65 फीसद पाया जाता है जबकि अजवाइन में इसकी मात्रा 28 से 30 फीसद होती है। भविष्य में इसके क्रिस्टल तैयार कर निर्यात के दरवाजे खुलेंगे क्योंकि विदेश में इसकी मांग अधिक है।

आलू के बाद बेहतर उत्पादन

कन्नौज, फर्रुखाबाद, आगरा, मैनपुरी समेत आसपास के आलू बेल्ट वाले जिलों में इसकी पैदावार से किसानों को बेहतर कमाई होगी। आलू की खोदाई के बाद जनवरी से फरवरी के बीच बोआई का बेहतर समय होने से किसान फायदा उठा सकते हैं। मैदानी इलाकों, बुंदेलखंड में ङ्क्षसचाई संकट से निपटने का आसान रास्ता मोनार्डा के उत्पादन से मिलेगा।

यहां होगा इस्तेमाल

खाद्य सामग्री के तौर पर अजवाइन की जगह। मधुमेह, दिल की बीमारियों की औषधि बनाने में। मुंह की बदबू दूर करने व कब्ज से राहत पा सकेंगे। शरीर का मोटापा कम करने की औषधि निर्माण में सहायक। सर्दी व कफ से राहत, अस्थमा के खतरे को रोकेगी। पेट के कीड़े दूर करने, अनिद्रा से छुटकारा पाने में।

‘केंद्र के वैज्ञानिकों व अफसरों की देखरेख में मोनार्डा सिट्रियोडोरा की पैदावार उत्तर भारत के इलाकों में करने का परीक्षण सफल रहा है। इसकी खेती कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। यह खेती किसानों की कमाई का बेहतर जरिया बनेगी।

– शक्ति विनय शुक्ला, प्रधान निदेशक एफएफडीसी कन्नौज।

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