Saffron cultivation in Agra

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ताजनगरी में महकी केसर की क्यारी, पहलीबार हुई खेती

ताजनगरी में पहली बार केसर की खेती रुनकता में शुरू हुई है। पहाड़ों के इस केसरिया सोने की खेती से यहां के किसानों को लागत से 25 गुना मुनाफा होने की उम्मीद है। मथुरा में किसानों की पहल के बाद आगरा के किसान इससे प्रेरित हो रहे हैं।
रुनकता के पनवारी गांव में किसान शिशुपाल सिंह ने डेढ़ एकड़ जमीन पर केसर की खेती की है। क्यारी महक रही है, अप्रैल तक फसल तैयार हो जाएगी। इसकी लागत करीब 1.50 लाख रुपये प्रति एकड़ आई है। कृषि विशेषज्ञ 20-25 किलो केसर प्रति एकड़ पैदावार होने की बात कह रहे हैं।

बाजार में गुणवत्ता के आधार पर केसर के 80 हजार से एक लाख रुपये प्रति किलो के भाव हैं। इसकी खेती विशेषज्ञों की निगरानी में पूरी तरह से जैविक तरीके से की जा रही है। उप निदेशक उद्यान कौशल कुमार नीरज ने बताया कि आगरा में केसर की खेती पहली बार शुरू हुई है, इसमें अच्छा मुनाफा है। 45 किसानों ने इसकी खेती के लिए संपर्क किया है।

लैब टेस्ट के बाद तय होती है कीमत

सात महीने में केसर की फसल तैयार हो जाती है। इसके फूल को सुखाकर एकत्रित किया जाता है, जिसकी जांच सरकारी प्रयोगशाला में कराई जाती है। जांच में गुणवत्ता तय होने के बाद किसान को प्रमाण पत्र दिया जाता है। इसके आधार पर ही किसान को 80 हजार से एक लाख रुपये तक का भुगतान खरीददार करते हैं।

सफेद मूसली, बिना बीज के नीबू की भी कर रहे खेती

शिशुपाल सिंह बिना बीज के नीबू, अनार और सफेद मूसली की खेती भी कर रहे हैं। बिना बीज के नीबू की हर्बल प्रोडक्ट और अचार बनाने में बड़ी मांग रहती है। सफेद मूसली की लागत प्रति एकड़ 60-70 हजार रुपये रहती है। तीन से चार लाख रुपये प्रति एकड़ की बचत हो जाती है। आयुर्वेदिक दवा बनाने वाली कंपनियां इसे खरीद के लिए पहले से ही बुक कर लेती हैं।

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