किसान

Rajendra Yadav

ऐ ख़ुदा बस एक ख़्वाब सच्चा दे दे, अबकी बरस मानसून अच्छा दे दे, किसान की आह जो दिल से निकाली जाएगी क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी छत टपकती हैं उसके कच्चे मकान की, फिर भी “बारिश” हो जाये, तमन्ना हैं किसान की.