किसान सत्यवान

Satyavan

ग़रीब के बच्चे भी खाना खा सके त्योहारों में, तभी तो भगवान खुद बिक जाते हैं बाजारों में. परिश्रम की मिशाल हैं, जिस पर कर्जो के निशान हैं, घर चलाने में खुद को मिटा दिया, और कोई नही वह किसान हैं.