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This women proved her self as a successful farmer

This women proved her self as a successful farmer

जानिये कैसे मध्य प्रदेश की यह महिला हर साल 2 लाख रुपये की अधिक आय ले रही हैं

यदि आपके अंदर जूनून है तो फिर आपको कोई नहीं रोक सकता चाहे कितनी भी मुश्किल क्यों न आए. जब हम महिलाओं की बात करतें हैं तो यदि वो मेहनत करने पर आ जाए तो अपनी मंजिल को आसानी से हासिल कर सकती है. ऐसा एक उदाहरण पेश किया है मध्य प्रदेश के श्योपुर की महिला किसान कमलेश ने जिनकी माली हालत बिलकुल भी ठीक नहीं थी . उनके तीन बच्चे है जिनका भरण पोषण दोनों पति-पत्नी मिलकर करते हैं, लेकिन फिर भी सही से गुजारा नहीं हो पाता है.भारत में महिला शशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करने. इसके लिए राज्य सरकारें भी प्रयासरत है. जिसके लिए राज्य सरकार ने अलग-अलग योजनाए चलायी हुयी है. जिसका लाभ कमलेश को भी मिला है. राज्य सरकार के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में योजनाओं का लाभ ग्रामीण अंचलों तक प्रदान किया जा रहा है.

नहीं चलता था घर का खर्च :

मध्य प्रदेश के विकासखंड श्योपुर के ग्राम पंचायत पानड़ी के ग्राम डाबरसा निवासी कमलेश ने अपने अपने पत्नी जगदीश के साथ खेत में भी हाथ बटाती थी लेकिन फिर भी घर का खर्च नहीं चल रहा था, इसका कारण था कम खेती भूमि और तीन बच्चो की पढ़ाई. इसलिए उन्होंने कुछ अलग करने की सोची और नए काम की तलाश में जुट गयी. 42 वर्ष की आयु में कमलेश पांचवी उर्त्तीण होने के बावजूद रोजगार की दिशा में निरंतर प्रयत्न कर रही थी. साथ ही अपने पति को रोजगार दिलाने में भी इधर-उधर चर्चा कर रही थी. तभी उनके गांव में राज्य ग्रामीण आजिविका मिशन के कर्मचारी पहुंचे. उनकी सलाह से कमलेश ने प्रारंभ में अंबेडकर समूह बनाकर गांव की महिलाओं को जोड़ने के प्रयास किए और आटा चक्की लगाई. अब वह आटा चक्की चलाकर 2 लाख रूपए वार्षिक प्राप्त कर रही हैं. इस व्यवसाय से परिवार की माली हालत में सुधार आया है. उन्होंने खेती के कार्य में भी पति का सहयोग दिया.

दूसरी महिलओ को दे रही हैं प्रशिक्षण

कमलेश बैरवा समूह की महिलाओं के साथ अपने आटा चक्की के व्यवसाय को बढ़ावा दे रही हैं . साथ ही मिशन के माध्यम से प्रशिक्षण देकर समूह की सक्रिय महिला के रूप में अपनी पहचान भी बना रही थी. उन्होंने मिशन से आटा चक्की के लिए ऋण लिया. उनके द्वारा लगाई गई आटा चक्की से गांव के कई परिवार आटा पिसाने के लिए आने लगे. जिससे निरंतर उनकी आय में वृद्धि होती रही. कमलेश बताती हैं कि, मैं अपने तीन बच्चों की पढ़ाई लिखाई का खर्चा उठा रही हूं. साथ ही पति की खेती में सहारा दे रही हूं. मुझे वर्तमान में 2 लाख रूपए वार्षिक आय आटा चक्की के व्यवसाय से प्राप्त हो रही है. जिसके लिए मैं मप्र सरकार, जिला प्रशासन और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की आभारी हूं. इस तरह से कमलेश ने अपनी मुश्किलों से पार पाया जिसकी वजह से आज वो एक खुशहाल जीवन बिता रही हैं. इससे हमें सीख लेनी चाहिए.

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने कि मदद :

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन सरकार द्वारा संचालित योजना है. जिसके तहत ग्रामीण लोगो को आजीविका से जोड़ने के लिए एक संघटन तैयार किया जाता है. जिसमें उनको सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्रदान कि जाती है .कमलेश को भी इसी तरह से ग्रामीण आजीविका मिशन ने मदद की

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