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Wonders in the desert from organic farming

Wonders in the desert from organic farming

अमेरिकन केसर की खेती
अमेरिकन केसर की खेती

जैविक खेती से राजस्थान के मरुस्थल में चमत्कार

जो सपने देखते है और उन सपनो को पूरा करने की कीमत चुकाने को तैयार रहते है वही लोग जीवन में सफल होते है। यह साबित किया है नाथुसिंह भाटी ने। नाथुसिंह भाटी राजस्थान के मरुस्थल के छायण गांव के रहने वाले एक साधरण से किसान है, जिन्होंने मरुस्थल जैसे स्थान पर (जहाँ ज्यादातर भूमि बंजर है) 1700 से अधिक अनार के पौधे लगाकर अपने सपनो को उड़ान दी, और साथ ही लोगो के लिए प्रेरणा भी बन गए है।

नाथुसिंह भाटी ने कहा कि उन्होंने दो हेक्टेयर भूमि में अनार के पौधे लगाए है और बहुत जल्द ही इन पौधो से फल भी मिलेगा । उनका कहना है कि उन्होंने यह अनार जैविक खाद, बीज एवं गौमूत्र का उपयोग कर उगाया है। नाथुसिंह भाटी बताते है कि इस प्रकार की खेती की शुरुआत का विचार नाथुसिंह को कृषि विज्ञान केन्द्र, काजरी जोधपुर में एक मीटिंग में जाने के बाद आया।

किसान नाथुसिंह भाटी ने बताया कि जैसलमेर एग्रीकल्चर विभाग के अधिकारी खींयाराम एवं काजरी के हरदयाल के निर्देशानुसार ये फसल उगाई, जिससे उन्हें बेहतर परिणाम भी मिला। नौ महीने से नाथुसिंह और उनकी पत्नी इन पौधो की बहुत हिफाज़त कर रहे है, किसान परिवार को इस बात की उम्मीद है कि तीन साल बाद पंद्रह लाख रुपए सालाना आय हो जायेगी। इस अनार की खेती के साथ ही तरबूज की खेती भी पांच बीघा में की गई है और अब तक डेढ़ लाख रुपए के तरबूज बाजार में बेच चुके है। अब भाटी जैतून के बगीचे लगाने की तैयारी कर रहे है।

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